अक्षय भारत : 10 अप्रैल 2026
नई दिल्ली: डिजिटल ट्रांजैक्शन के नाम पर होने वाली ठगी को जड़ से खत्म करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी में है। अब बड़े अमाउंट वाले UPI और ऑनलाइन पेमेंट तुरंत पूरे नहीं होंगे, बल्कि उन्हें 1 घंटे के 'कूलिंग टाइम' से गुजरना होगा।
क्यों जरूरी हुआ यह नियम?
साइबर ठगी के बढ़ते आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। साल 2021 में जहाँ ₹551 करोड़ की धोखाधड़ी के 2.6 लाख मामले थे, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 28 लाख मामले (₹22,931 करोड़) तक पहुँच गए हैं। RBI के डिस्कशन पेपर के अनुसार:
- ₹10,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन कुल फ्रॉड की 98.5% रकम के लिए जिम्मेदार हैं।
- ठग अक्सर 'जल्दबाजी' का दबाव बनाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। 1 घंटे की देरी से यह दबाव टूटेगा और यूजर को सोचने का समय मिलेगा।
RBI के 4 बड़े प्रस्ताव: जो बदल देंगे डिजिटल पेमेंट का तरीका
1. ₹10,000+ ट्रांजैक्शन पर 'होल्ड'
अगर आप ₹10,000 से ज्यादा किसी को भेजते हैं, तो वह पैसा तुरंत क्रेडिट नहीं होगा। 1 घंटे के कूलिंग पीरियड के दौरान आपके पास ट्रांजैक्शन को कैंसिल करने का विकल्प रहेगा।
2. संदिग्ध लेन-देन पर दोबारा कन्फर्मेशन
सिस्टम को किसी भी ट्रांजैक्शन पर शक होने पर बैंक उसे रोक देगा और ग्राहक से दोबारा पुष्टि (Confirmation) मांगेगा। हालांकि, छोटे मर्चेंट पेमेंट, चेक और बिजली-पानी के बिल जैसे 'ई-मैंडेट' इस नियम से बाहर रहेंगे।
3. 'शैडो क्रेडिट' और ₹25 लाख की लिमिट
छोटे खातों या इंडिविजुअल अकाउंट्स में साल भर में ₹25 लाख से ज्यादा आने पर उसे 'शैडो क्रेडिट' में रखा जाएगा। यानी पैसा दिखेगा तो सही, पर इस्तेमाल तब तक नहीं होगा जब तक बैंक को पैसे का स्रोत (Source) न बता दिया जाए। संतोषजनक जवाब न मिलने पर 30 दिन में पैसा वापस लौट जाएगा।
4. 'किल स्विच' की सुविधा
धोखाधड़ी का अहसास होते ही ग्राहक एक क्लिक में अपने सभी डिजिटल पेमेंट चैनल (UPI, नेट बैंकिंग आदि) बंद कर सकेगा। यह तकनीक सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पहले से सफल है।
बुजुर्गों के लिए 'सेफ्टी गार्ड'
70 साल से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा का सुझाव दिया गया है। ₹50,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन के लिए परिवार के किसी 'भरोसेमंद व्यक्ति' (Trusted Person) की डिजिटल मंजूरी अनिवार्य हो सकती है।
क्या होगा असर?
- फायदा: गलत ट्रांजैक्शन या फ्रॉड की स्थिति में पैसा वापस पाने का मौका मिलेगा।
- चुनौती: 'इंस्टेंट पेमेंट' की रफ्तार थोड़ी धीमी हो जाएगी। हालांकि, आप अपने भरोसेमंद लोगों को 'व्हाइटलिस्ट' कर सकते हैं, ताकि उनके साथ लेन-देन में कोई देरी न हो।
अपनी राय दें: RBI ने इन नियमों पर जनता से सुझाव मांगे हैं। आप 8 मई 2026 तक अपनी राय 'कनेक्ट टू रेगुलेट' पोर्टल के माध्यम से दे सकते हैं।

